मंदिर की विरासत
पोळली राजराजेश्वरी मंदिर सदियों की भक्ति, स्थानीय लोककथाओं और जीवित अनुष्ठान परंपराओं को संजोए हुए है। इसकी कहानी मौखिक परंपरा और वार्षिक उत्सव समारोहों में सुरक्षित है।
दवेता
मुख्य देवता श्री राजराजेश्वरी देवी की पूजा ब्रह्मांड की माता के रूप में की जाती है। देवी अपने दिव्य मिट्टी के रूप में दिखाई देती हैं, जो पोंधली मंदिर की एक अनूठी विशेषता है।
प्राचीन मूल
किंवदंतियों के अनुसार, मंदिर की स्थापना राजा सुरथ ने की थी, जिन्होंने हजारों साल पहले यहां तपस्या की थी।
नवीनीकरण और विकास
मंदिर में कई महत्वपूर्ण जीर्णोद्धार हुए हैं, जिनमें से सबसे हालिया भव्य ब्रह्मकलशोत्सव है।
शाही रथ
केळदी साम्राज्य की रानी चेन्नम्मा द्वारा निर्मित 400 वर्ष पुराना रथ, पोळली मंदिर को भेंट किया गया — अब मुदिपु ISKCON ध्यान केंद्र में संरक्षित।

